Episode-1
Episode-2
Episode-3
वह चाय ही क्या जिसमे उबाल ना हो और वह प्यार ही क्या जिसमे बवाल ना हो।
जब तुम मुझसे प्यार करोगी तभी मैं तुमसे प्यार करूंगा ।
सच में क्या प्यार पर इतना बस चलता है?
और जिस पर बस चलता है क्या वह सचमुच प्यार है?
मेरा अनुभव तो कहता है दिल जिस पर एक बार आ गया उसे भूलने को तैयार नहीं हो सकता और जो पागल ना कर दे वो प्यार नहीं हो सकता।
हमारे जिंदगी में बहुत सारे ऐसे पल होते हैं जिन्हें भूलना बहुत ही मुश्किल होता है। उन सब में एक पल ऐसा भी होता है जब हमें अपने स्कूल लाइफ में किसी से प्यार होता है।
उस समय कि वह फीलिंग हमारे लिए बिल्कुल नई होती है। और हम उसमें इतने रम जाते हैं कि हमें कुछ और दिखता ही नहीं है।
कभी-कभी हमें पता होता है कि यह प्यार सारी जिंदगी के लिए नहीं है। फिर भी हम अपनी पूरी जान लगा कर किसी से प्यार करते हैं।
अक्सर स्कूल कॉलेज में हुआ प्यार किताबों के पन्नों में सिमट कर रह जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि वह जिंदगी भर का एक रिश्ता बन जाए। लेकिन ऐसा कम ही सुनने को मिलता है।
इस कहानी में हम कुछ ऐसा ही सुनने वाले हैं। जिंदगी की पहले प्यार का पहला अनुभव।
मुझे याद नहीं कि मैं स्कूल में नामांकन लेने के बाद वहा पढ़ने कब गया था। वैसे स्कूल जाऊं भी क्यों मेरी सारी पढ़ाई तो कोचिंग से होती थी और भाई साहब मेरे जैसे बच्चे स्कूल में 6-6 घंटे करेंगे क्या?
पर उस दिन स्कूल में परीक्षा होने की वजह से मेरा मन ना करते हुए भी मैं स्कूल गया। लेकिन जब मैं स्कूल से वापस आ रहा था और यह गाड़ियों का फालतू के पो पो की आवाज से मैं परेशान हो रहा था। तभी मेरी नजर एक लड़की पर गई। एक खूबसूरत सी लड़की काली आंखें और लंबे बालों वाली जिसके माथे पर शायद एक छोटी सी लाल बिंदी थी। जो अपने हाथों में कुछ किताब लिए हुए चली आ रही थी।
मुझे लगा कि वह एक भटकती खुशबू मैं एक हवा का झोंका ना उसने मुझको बांधा ना मैंने उसको रोका। उस वक्त में एक अजीब सी माहौल को महसूस कर रहा था। मेरे पूरे शरीर में एक अजीब झनझनाहट दौड़ रही थी ।मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं इस लड़की को बहुत पहले से जानता हूं। लेकिन मुझे उस समय अपने दिमाग पर बहुत जोर डालने के बाद भी मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा था। तभी मेरी खुराफाती दिमाग में एक ख्याल है।
क्यों ना इसके पीछे जाऊं?
और यह पता लगाया जाए कि यह जाती कहां है। यह सोचने के साथ ही मैं उस समय उसके पीछे पीछे चल पड़ा।
कुछ देर के बाद मैंने देखा कि वह एक इंग्लिश क्लास में चली गई। कुछ देर वहां खड़े रहा फिर मैं यह सोचते हुए वापस आ गया कि यह लड़की कौन है? जिसे देखकर ही मुझे अपनापन जैसा महसूस हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि मैं इसे बहुत पहले से जानता हूं।
मैं अपने रूम में अकेला बैठकर कुछ सोच रहा था। तभी मुझे वह लड़की याद आई जो उस दिन मुझे दिखी थी। अब मैं अपने छोटे से दिमाग पर बहुत ज्यादा जोर डाल रहा था। तभी अचानक से मुझे कुछ धुंधली धुंधली याद आई
अरे यार "यह तो राधा है"
राधा का नाम याद आते ही अचानक से मेरी बचपन की सारी यादें ताजा हो गई। बचपन में मैं इसके साथ पढ़ा करता था। धीरे-धीरे मैं पुरानी यादों में डूबता चला जा रहा था
जब स्कूल जाया करता था उस वक्त मेरे कुछ दोस्त थे। उनमें एक लड़की थी, पर ना जाने क्यों मेरे लिए बहुत खास थी। सारी स्कूल में मै सिर्फ राधा से ही बात किया करता था। वह गर्ल्स की रो में लेफ्ट साइड बैठती थी तो मैं राइट साइड। मतलब हम दोनों कभी कभी एक साथ बैठते थे बस दोनों के बीच में कुछ दूरी होती थी जितना दो बेंच की बीच में होती है ना उतना ही।
मुझे आज भी वह दिन याद है जब मैं कागज की नाव बना रहा था और वह एक मांगी। तो मैंने बहुत प्यार से उसे एक नाव बनाकर दिया। कुछ और तो याद नहीं पर हां,
होली का वह दिन मैं अपने छत पर शाम को गुलाल से होली खेलने की तैयारी कर रहा था पर शायद शाम हुआ नहीं था दोपहर ही था। तभी "बेटा तुमसे कोई मिलने आया है" यह कहकर मां ने मुझे बुलाया।
जब मैंने जाकर देखा तो वह राधा थी। उस समय मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि उसे मेरे घर का एड्रेस कहां से मिला। क्योंकि उस वक्त में बहुत ही छोटा था और किसी को मेरे घर अचानक ही चले आना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता।
पर कुछ भी हो पर मुझे उस समय उससे गुलाल लगाना चाहिए था। लेकिन उस समय शायद मेरी बुद्धि का उतना विकास नहीं हो पाया था, जितना कि होना चाहिए था और मैंने उसे गुस्से में वहां से जाने के लिए बोल दिया।
वह बेचारी क्या करती, उदास होकर वहां से चली गई। शायद उस समय उसे बहुत बुरा लगा होगा। यह सब सोचते सोचते कब मेरा कोचिंग क्लास का टाइम हो गया मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला।
आज कई सालों बाद वह मुझे मिली, शायद वह मुझे ना पहचानी हो लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे "पल भर वह मुझ में ठहरे तो देर तक मैं महकू , दो घूंट पीकर मैं उसको, पागलों सा बहकू।
उसका नाम कितना अच्छा है राधा। जिसे सुनकर ही प्रेम का अनुभव होता है। इस बार में बचपन वाली गलती नहीं करने वाला था।
मैं उससे मिलना चाहता था उससे बातें करना चाहता था लेकिन कैसे? फिर यह बात मैंने अपने दोस्तों को बताई। अब देखो, लड़कियों का तो पता नहीं लेकिन लड़कों के दोस्त जितना चंट, चालाक और ह**** होते हैं, उतना ही वह अच्छे भी होते हैं। वे लोग मुझे इस बात पर चिढ़ाने लगे, लेकिन उस लड़की का पूरा बायोडाटा ही मेरे पास रख दिया जैसे वह कहां रहती है कहां पढ़ने जाती है और वह सब जिसकी मुझे जरूरत थी।
सावली सी चेहरा काली आंखें और लंबी बालो वाली | School life love story
Twelfth Night by William Shakespeare | a love story
राधा मेरे से एक क्लास सीनियर थी शायद इसलिए क्योंकि मैंने बचपन से इतने स्कूल और क्लास चेंज किए जो मुझे भी याद नहीं। कुछ दिनों के बाद मैंने भी इंग्लिश क्लास ज्वाइन कर लिया जिसमें राधा जाती थी। मैं उसके बैच के बाद वाले बैच में था मतलब जब उसकी क्लास खत्म होती थी तो मेरी क्लास शुरू होती थी।
इन दोनों बैच के बीच में थोड़ा समय होता था, उसमें मैं सिर्फ उसे ही निहारा करता था।
1 दिन की बात है, किसी कारणवश हम दोनों की क्लास एक साथ होने वाली थी। जब मुझे यह बात पता चला तो मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे मैं सोच रहा था कि आज राधा से जरूर बातें करूगा। लेकिन बचपन वाली बातों से वह आज भी नाराज हुई तो? और मेरे साथ मेरे दो जोकर दोस्त भी तो थे। मैं यह सब सोच ही रहा था कि तभी एक दोस्त का कॉल आया - अरे यार आज कुछ काम है इसलिए मैं और सागर दोनों क्लास नहीं आएंगे।
यह सुन कर के तो मुझे मजा आ गया। अब हम दोनों बैच में एक साथ बैठ कर पढ़ रहे थे। मैं उसे एक टक से निहार रहा था और मैं उससे कुछ बातें करना चाहता था। पर पता नहीं क्यों मेरे अंदर एक अजीब तरह की झिझक थी। जिसकी वजह से मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। शायद मुझे शर्म आ रहा था या फिर कुछ डर रहा था यह तो मुझे पता नहीं। पर इन सब कसमकस के बीच में मैं उससे कुछ बोल नहीं पाया।
पर कहते हैं ना प्यार में भी अजीब होता है, जब तक हम अपने प्यार को ना देख ले तब तक चैन ही नहीं आता। भले ही वो एक तरफा प्यार ही क्यों ना हो। ठीक इसी तरह मेरी स्थिति भी थी। मैं राधा के घर के आस-पास उसे सिर्फ एक बार देखने के लिए मंडराने लगा । ठीक उसी तरह से जिस तरह मधुमक्खियां पुष्प के ऊपर मंडराती है। उस समय मेरी इस छोटे से दिमाग में थोड़ा सा भी यह ख्याल नहीं आता कि उसके घर के आस-पास हमेशा भटकते हुए देखकर लोग क्या सोचेंगे। शायद इसलिए कि उस समय मेरे दिलो दिमाग में तो सिर्फ राधा ही रहती थी।
1 दिन की बात है वह मुझे मार्केट में मिली मतलब मैंने उसे देखा। वह अपनी छोटी बहन के साथ थी। फिर मैं उसके पीछे पीछे चल पड़ा। तेरे पीछे चल पड़े हम यह गाना दिमाग में सोचते हुए।
पर अचानक से वो रुक गई, पीछे मुड़ी और मुझसे बोली - तुम मेरा पीछा कर रहे हो क्या?
न न नहीं तो, मैंने थोड़ी लड़खड़ाते हुई आवाजों में बोला। उस समय मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी और मेरी बोलती बंद हो गई। वह अलग बात है कि उसकी यह बात भी मुझे सुरीली लग रही थी।
ऐसा होना भी नहीं चाहिए और वह बोल कर चली गई।
मैं एक टकटकी भरी निगाहों से उसे देखता रह गया। लेकिन इसके 2 दिन बाद वह मुझे फिर से मिली। उसे देखकर मेरा मन फिर से हरा भरा होने लगा। उस समय हम दोनों रोड पर थे। वह धीरे से बोली इधर अकेले में आना तुमसे कुछ बातें करनी है। जब मैं उसके पास गया तो वह मुझसे बोली - तुम्हें जो कुछ भी बोलना है बोलो क्योंकि तुम खुद से बोल तो पाओगे नहीं।
अब क्या बताऊं मैं जो अपने दोस्तों के सामने बाहुबली बनता फिरता था पर यहां पर तो मेरे सिटी गुम थी। वह क्या है कि लड़कियों के सामने बहुत सारे लड़कों को अचानक ही भूलने और से हकलाने की आदत हो जाती है। वैसे ही यहां पर मेरे साथ भी हो रहा था।
फिर राधा बोली- मुझसे प्यार-व्यार तो नहीं करने लगे हो ना?
उस समय मेरा दिल की धड़कन थोड़ी तेज हो गई, मुझे थोड़ा डर लगने लगा। क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि राधा मुझसे कभी ऐसे बोलेगी। उसके सामने आने से ही मेरा दिल की धड़कन तेज हो जाती थी आज तो वह मुझसे यह सब बोल रही थी सोचो मेरा उस समय क्या हाल हो रहा होगा।
मैं चुपचाप वहां खड़ा था। मेरे मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रही थी।
फिर वह दूसरी बार मुझसे बोली - कुछ बोलना चाहते हो मुझसे?
मैं फिर कुछ बोल नहीं पाया। इसके बाद वह वहां से चली गई और मैं वही खरे खरे उसे एक प्यार भरी नजरों से देखे जा रहा था। हम लड़कों के साथ यही तो होता है पता नहीं क्यों हम जिसे चाहते हैं, उसे बताने से इतना डरती क्यों है।
वो कहते हैं ना "आंखों में आंसू हो पर लबों पर हंसी लानी पड़ती है, यह मोहब्बत भी क्या चीज है जिससे करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।"
इस घटना को मैंने अपने एक दोस्त को बताया और उससे कहा कि तुम अपनी गर्लफ्रेंड को राधा के घर भेजो। क्योंकि मैं राधा को कुछ बोल नहीं पाया था, तो वह मेरी तरफ से बात कर लेगी। मेरे फ्रेंड की गर्लफ्रेंड जब अपने सहेलियों के साथ उसके घर गई और मेरे बारे में बात करना चाहिए।
तब राधा बोली - मैं उसे पसंद नहीं करती वह एक नंबर का लफुआ है।
ओह! मेरे बारे में कितनी अच्छी बाते हो रही थी वहां।
यह सुनकर वह लड़की वापस आ गई और मुझे सब बातें बताइए।
मैंने थोड़ा बनावट मुस्कान के साथ
बोला - मैं पहले से सोच ही रहा।
पर कहते हैं ना अगर किसी को पूरे शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने में लग जाती है। ठीक इसी तरह से वह दो-तीन दिनों के बाद एक बार फिर मुझे उसी मार्केट में मिली मतलब मुझे मार्केट में दिखी।
वह एक दुकान से समोसा चाट खरीद रही थी। यह उसका पसंदीदा पकवान है। मैं कुछ दूर अपने एक दोस्त के दुकान से उसे देख रहा था। मैं उसके पास यह सोचकर नहीं जा रहा था कि चाट उसकी पसंदीदा है और चाट तो दो तरह की होती है कही दूसरी वाली मुझे मेरे गालों पर ना मिल जाए।
पर अचानक से वह मेरी तरफ की आने लगी। मैं उसे आता देखकर तुरंत ही दुकान के बगल में खड़ा हो गया। क्योंकि उस दुकान पर मेरे दोस्त के भैया थे।
अरे यार यह भैया भी ना हमेशा गलत टाइम पर गलत जगह पर होता है यह कहते हुए मेरा दोस्त वहां से खिसक गया।
मैं वहां पर बिल्कुल अकेला रह गया।
राधा मेरे पास आई - "तुम फिर से मेरा पीछा कर रहे हो?"और हां तुमने किसी लड़की को मेरे पास भेजा था और जरा अपना हाथ दिखाओ क्या लिखे हो अपने हाथ पर।
अब हर बार की तरह इस बार भी मेरी बोलती बंद थी। मेरे मुंह से आवाज नही निकल रही थी और निकलने भी कैसे? उस समय मैंने अपने हाथ पर उसका नाम का पहला अक्षर लिखा था, वह भी ब्लेड से काट कर। ब्लेड से उसका नाम अपने हाथ पर लिखते समय मुझे दर्द तो हुआ था लेकिन प्यार में उसे याद करके वह दर्द भी पता नहीं कहां गायब हो गई थी। मुझे यह समझते हुए देर नहीं लगी कि जिस लड़की को मैंने राधा के पास भेजा था, उसने यह सब भी उसे बता दिया होगा। यहां राधा मुझसे हाथ दिखाने के लिए बोल रही थी।
क क कुछ भी तो नहीं, मैंने थोड़ी लड़कर आती हुई आवाज में बोला। मैंने उससे अपना हाथ दिखाया नहीं। इसलिए वह यहां से चली गई। कुछ देर के बाद मेरे दोस्त भी आ गए और मैं भी वहां से चला गया।
जब बहुत कुछ होता है कहने को तब इंसान हमेशा खामोश रहने लगता है। मेरी स्थिति भी ठीक ऐसी ही थी। मैं न जाने क्यों हमेशा राधा को ही याद कर रहा था सोते समय जागते समय हर समय। क्या वह मेरे लिए इतना जरूरी हो गई थी? कि बिना उसके बारे में सोचें हुए मैं एक पल भी नहीं रह सकता। मैं सोच रहा था जब वह पूछती थी तब मुझे उस वक्त उसे बोल देना चाहिए था।
हां, मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मेरे लिए तुम्हारे बिना जीना एक एक पल कई वर्षों के बराबर है।
अब तक उसका बोर्ड्स का एग्जाम खत्म हो चुका था और मेरा बोर्ड्स आने वाला था। पर कुछ दिनों के बाद मुझे पता चला कि वह लगभग सुबह के 6:00 बजे शहर में कहीं पढ़ने जाती है। मैंने सोचा क्यों ना सुबह के वक्त ही उससे बात किया जाए और अपने प्यार का इजहार किया जाए। वैसे भी सुबह में बहुत कम लोग होते हैं जो हमें बातें करते देखेंगे।
आज मैंने सोच लिया था कि राधा से बातें करूंगा और उससे बोलूंगा कि -
बड़ा दिलकश होता है वह मंजर जब तुम दिखती हो मेरे ख्वाबों के अंदर। उस दिन मैं राधा के सामने आया। मैं उसके सामने खड़ा हो गया। उस वक्त में राधा को सब कुछ बताना चाहता था । शायद राधा को पहले से ही पता था कि मैं उसे क्या बोलने वाला हूं। मैं जब बोलने ही वाला था कि
राधा मुझसे बोली - मैं प्यार व्यार के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती और हां इस बार तुम्हारा बोर्ड से है ना तो इन सब चक्रों में मत परो और पढ़ाई करो।
इस बार मैं उससे बोलना तो चाहता था पर उसकी यह बात सुनकर मै बिल्कुल चुप हो गया। पता नहीं कितने बार मैं उसके साथ उसके कोचिंग तक गया, लेकिन वह एक बार पूछी भी नहीं कि तुम यहां तक मेरे साथ क्यों आते हो।
मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड दीपशिखा का बर्थडे आने वाला था। मैंने दीपशिखा को बोलकर राधा के पास भेजा कि तुम अपने बर्थडे पार्टी में राधा को भी इनवाइट करना।
अपने बर्थडे की 1 दिन पहले राधा के घर गई और उसे अपना बर्थडे में आने के लिए इनवाइट किया। बर्थडे पार्टी एक होटल में होनी थी। पर शायद मेरी भाग्य को कुछ और ही पसंद था। जिस दिन दीपशिखा का बर्थडे पार्टी था उसके 1 दिन पहले रात को मेरे इलाके में गोलीबारी हो गई। जिसके वजह से पूरे बाजार को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया। कुछ दिनों के बाद हमारे इलाके का माहौल ठीक हो गया और बाजार अपने नियत समय पर खुलने लगी। कुछ दिनों के बाद मैंने दीपशिखा को राधा के घर भेजा और मैंने कहा कि राधा से कहना, जो बर्थडे पार्टी मेरे बर्थडे के दिन नहीं हो पाई थी वह अब होगी। दीपशिखा अपने दो दोस्त के साथ राधा के घर गई।
राधा ने पूछा - बर्थडे पार्टी में वह भी आ रहा है क्या?
दीपशिखा - हां वह भी आ रहा है।
राधा – अगर वह आएगा तो मैं नहीं आऊंगी।
पर दोस्तों में एक अलग प्रकार का ही बंधन होता है। कुछ देर मनाने के बाद राधा बर्थडे पार्टी में आने के लिए तैयार हो गई। उसे तैयार होने में लगभग 10 मिनट का समय लगा। वो 10 मिनट किसी 30 मिनट से कम नहीं था या बोलिए कि वह 30 मिनट ही था। जिस वक्त राधा तैयार होने गई उसी वक्त दीपशिखा मेरे पास कॉल की ।
वह बोली – राधा आने के लिए तैयार हो गई है।
उस वक्त मैं कोचिंग क्लास में था। मैंने सर से छुट्टी मांगी। वाह! जो टीचर किसी को छुट्टी नहीं देते थे, वह मुझे बिना रीजन जाने ही बीच क्लास से छुट्टी देने के लिए तैयार हो गया। मैं जल्दी से घर गया और अपने कपड़े बदले।
हां मै आज सुबह ही एक गुलाब का फूल लाया था। बैग में रखने के कारण वह गुलाब भी सूख गई थी। मैं सोच रहा था कि मैं राधा को एक प्लास्टिक का गुलाब दूं और बोलूं – जिस तरह से यह प्लास्टिक का गुलाब दू जो कभी मुर्झयागा नहीं। और उसे बोलूंगा कि जिस तरह से यह गुलाब कभी मुर्झयागा नहीं उसी तरह मैं तुम्हारे जीवन को कभी मुरझाने नहीं दूंगा।
फिर भी मैं वह सूखा हुआ गुलाब लेकर उस होटल में आया जिसमें पार्टी होने वाली थी। मैं अपने दो दोस्तों के साथ वही पर उसका इंतजार कर रहा था।
तभी मैंने देखा राधा, दीपशिखा के साथ आ रही थी। वह गुलाबी रंग का सूट और अपने लंबे बालों को इस तरह से रॉलअप की हुई थी कि क्या ही बताऊं। वह आज कहर ढा रही थी वह इतनी सुंदर लग रही थी कि मेरे दिल में घंटी बजने लगी। मेरे सामने होते हुए भी मैं उसके ख्यालों में इतना डूब चुका था कि वह मेरे पास कब आई मुझे पता ही नहीं चला।
मैं अपनी कुर्सी से खड़े होकर उसका स्वागत किया।
आज हम दोनों साथ बैठे हुए थे।
राधा मुझसे बोली – कुछ बोलना चाहते हो?
लो भाई साहब हो गया। हर बार की तरह पता नहीं क्यों मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था।
राधा फिर से बोली– बोलिए जनाब, कुछ बोलना है आपको?
मैं तो चाहते हुए भी कुछ बोल नहीं पा रहा था। लेकिन पता नहीं मेरे दोस्त हंसते हुए क्या बोल रहे थे। फिर मेरे दोस्त के कहने पर मैं वह गुलाब उसे देने लगा।
वह हंसकर बोली– यह तो सूख गया है।
मेरे दोस्त ने बोला– कोई बात नहीं तुम ऐसे ही रख लो।
पर इस गुलाब को रखना तो दूर इसे टच भी नहीं की।
राधा बोली अगर कुछ नहीं बोलना तो मैं जा रही हूं।
फिर हम लोगों ने उसे रुकने के लिए बोला। वह रुकी और जो उसने बोला उसे सुनकर मैं एकदम धक से रह गया।
राधा बोली – मेरा ऑलरेडी एक बॉयफ्रेंड है। इसे सुनकर तुम उदास मत होना। वह तुम्हारे बारे में जानता है। जब मैं उससे पूछी की पार्टी में जाऊं तो उसने आने से मना किया पर मैं उसे बिना बताए यहां आई हूं और हां मेरी पढ़ाई और कुछ फाइनेंसियल खर्च भी देता है।
वह तुम्हारी तरह हैंडसम तो नहीं है लेकिन फिर भी मैं उसी से प्यार करती हूं और उसी से शादी करूंगी।
यह जो तुम लाल बिंदी मेरे माथे पर देख रहे हो, यह सिंदूर का है। यह सिंदूर में उसी के नाम से लगाती हूं। मेरी कुछ सपना है मैं जीवन में कुछ बनना चाहती हूं और जब मेरी सपना पूरा हो जाएगी तब मैं उसी से शादी करूंगी।
यह सब जो बातचीत हुआ हम लोगों के बीच ही रहना चाहिए। मेरे भाई को यह सब मत बताना।
मैं तुमसे सिर्फ फ्रेंडशिप कर सकती हूं।
यह सुनकर मैं एकदम धक से रह गया। मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे ऑक्सीजन की कमी हो रही है, मैं सही से सांस नहीं ले पा रहा था। सब कुछ बर्बाद प्रतीत हो रहा था।
जिस प्रेम कहानी को शुरू होना था वह मुझे खत्म होता हुआ प्रतीत हो रहा था।
यह सुनने के बाद मैं कुछ और बोल नहीं पाया।
राधा बोली कुछ खाओ। तो मैंने सिर्फ न बोल दिया।
वह पहले हैंडसेक की और वहां रखी मिठाई में से थोड़ा सा अपने हाथों से मुझे खिलाई।
इतने में वहां होटल का एक वर्कर आया और बोला – कुछ लोग बाहर वेट कर रहे हैं इसलिए आप लोग यह जगह खाली कर दीजिए। बहुत ही खराब व्यवस्था है यार यहां की। यहां पर मेरी जिंदगी अटकी हुई है और इन महाशय को सिर्फ जगह की सूझ रही है।
हम सब लोग वहां से जाने लगे। जाते समय मैंने राधा को एक गिफ्ट दिया। वो उसे लेने से इनकार कर दी और वह दीपशिखा के साथ वापस अपने घर चली गई।
मुझे लग रहा था कि वादों की तरह इश्क भी आधा रहा, मुलाकात कम हुई इंतजार ज्यादा रहा।
जब तुम मुझसे प्यार करोगी तभी मैं तुमसे प्यार करूंगा। सच में? क्या प्यार पर इतना बस चलता है? और जिस पर बस चलता है क्या वह सचमुच में प्यार है? मेरा अनुभव तो कहता है दिल जिस पर एक बार आ गया उसे बोलने को तैयार नहीं हो सकता और जो पागल ना कर दे वह प्यार नहीं हो सकता।
पर कहीं ना कहीं मुझे राधा की वह बातें झूठ लग रही थी। क्योंकि राधा जो सिंदूर की बिंदी अपने माथे पर उसके नाम की लगाया करती थी वह आजकल नहीं दिखता। शायद हो सकता है उन दोनों का ब्रेकअप हो गया हो।
बात कुछ भी हो इस घटना के बाद मैंने राधा से आज तक बात नहीं की। मैंने अपने प्यार को अपने दिल में ही रख लिया। पर आज भी जब मैं उसे देखता हूं या उसके घर की तरफ जाता हूं तो मुझे एक अजीब सी खुशी मिलती है। मुझे मालूम नहीं कि मैं उसे अभी भी प्यार करता हूं या नहीं पर आज भी उसे बार-बार देखना मुझे अच्छा लगता है। जिस दिन वह मुझसे आखरी बार मिलने आई थी, वह दिन शायद मुझे जिंदगी भर याद रहेगी।
26 June 2018
मैं अंत में उसे कहना चाहूंगा की
दूर हो जाने के बाद भी रिश्ता बस इतना सा निभाना, जब भी देखो रास्ते में कहीं, नजरे मिला के हल्का सा मुस्कुराना।
The End

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