बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

उस घर में जहां से आधुनिकता की आंधी ना गुजरी हो अभी तक,

 

वहां मिट्टी के चूल्हे की रोटी खाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

खेत वाली झोपड़ी में बैठकर सफेद गाय का कच्चा दूध पीना है। फिर से वही चीनी वाला शर्बत जो गर्मियों में पीपल की छांव में बैठकर पीते थे सब...

आम के बगीचे में बैठकर परिंदों को उड़ाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

बुजुर्गों के पास बैठकर किस्से सुनने हैं उनके ज़माने के।

हंसी-मजाक भरी बातें और फिर अचानक से रामायण की कोई चौपाई सुनाते हुए गंभीर हो जाना।

अम्मा के हाथ चला ताजा मट्ठा और होली वाली गुझिया।

बूढ़े हो चुके दरख्तों की छांव में बैठकर पुराने गीत गुनगुनाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

घर के कनस्तर से चुराए गेंहुओं के बदले चुर्री और कंपट दिया करता था जो बनिया, उससे उधार लेकर कुछ मीठे आम खाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

दोस्तों संग सरकारी स्कूल के बरगद तले धूप में बैट-बल्ला खेलना है। फिर शाम को जाकर ट्यूबवेल के पानी में नहाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

जानता हूं आप देख नहीं सकते अब, आपकी आंखें बनकर आपको गांव का मेला घुमाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

रात को छत पर लेट कर तारे देखते हुए बातें करना.. ताई की वो कहानी जो अधूरी छोड़ दी थी उन्होंने, उस राजकुमार को फिर से जिलाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

आपका वो बेंत उठाकर वापस खींच लेना और फिर कहना कि टांगे तोड़ दूंगा... बाल नहीं कटवाने पर आपकी प्यार वाली डांट खाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं।

 

इस शहर की चमक तेज है, चमकीली है पर नकली है बाबा, गांव की मिट्टी को फिर माथे से लगाना चाहता हूं।

बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हू