ईश्वर आज अवकाश पर है | hindi best poetry


ईश्वर आज अवकाश पर है, न मंदिर की घंटी बजाइये, न मस्जिद की सीढ़ियों पर जाइये। जो बैठा है बूढ़ा अकेला पार्क में, उसके साथ समय बिताइये। जो भिखारी है लिये कटोरा हाथ में, उसमें दो चार सिक्के डाल आइये। कोई पीड़ित परिवार है अस्पताल में परेशान, उस परिवार की थोड़ी मदद कर आइये। जो गुजर गया हो कोई किसी परिवार में, उस परिवार को सांत्वना दे आइये। चौराहे पर खड़ा युवक है काम की तलाश में, उसे रोजगार के अवसर मुहैया कराइये। होटल में जूठे बर्तन धो रहा है अनाथ बच्चा, अगर पढ़ा सकते हैं तो उसे पढ़ाइये। एक बूढ़ी है जो भटक रही है दर-दर, उसे एक अच्छा सा लिबास दिलाइये। जो है मानसिक या शारीरिक विकलांग, उस पर थोड़ा तरस खाइये। जो घायल तड़प रहा है सड़क पर, उसे अस्पताल छोड़ आइये। जो नहीं पार कर पा रहा है रास्ता, उसकी मदद को आगे आइये। ईश्वर आज अवकाश पर है, न मंदिर की घंटी बजाइये, न मस्जिद की सीढ़ियों पर जाइये।