Author के ऑफिस में एक कर्मचारी को जॉब मिली थी। अब जॉब मिलने के बाद ही Author को समझ में आ गया था कि असल में इस आदमी को कुछ नहीं आता है और उसने अपने रिज्यूम में झूठ लिखा था। अब इस चीज से Author को गुस्सा आती है पर उन्हें उस आदमी की एक चीज बहुत अच्छी लगती है। वह आदमी बड़े जोश के साथ चीजों को सीख रहा था। खूब नोट्स बना के सबसे मदद लेकर और मेहनत करके। वह चीज लिखने में इतना अच्छा था कि उसने एक 2 महीने के अंदर ही और Author के level के जितना चीजें सीख ली थी। और वो उनके जितना ही अच्छा काम करने लगा था।जबकि Author को उस level पर पहुंचने में काफी ज्यादा समय लग गया था comparison to उस आदमी के।इसे देखकर कुछ सोचने लगे कि ऐसा कैसे होता है कि कुछ लोग चीजें बहुत जल्दी सीख लेते हैं और कुछ लोगों को सीखने और याद करने में काफी समय लग जाता है। उसे पता था कि जल्दी सीखने की skill बहुत पावरफुल हो सकती है लाइफ में आगे बढ़ने के लिए।
इसलिए उन्होंने इस बारे में रिसर्च करना स्टार्ट कर दिया। जिससे उन्हें पता चला कि हां जल्दी चीजें सीखने के पीछे बहुत ही साइंटिफिक रूल्स है।जिसे यूज़ करके कोई भी इंसान जल्दी चीजें सीख सकता है और कुछ भी बहुत जल्दी याद कर सकता है। यह सब रूल्स उन्होंने एक बुक में लिख दिए जिसका नाम है Science of Accelerated Learning.
तो मैं इसी बुक से आपको कुछ बातें बताने वाला हूं। जो आपको चीजों को जल्दी याद करने में आपका मदद करेगी।
1. Learning Paradon
स्टूडेंट के दो ग्रुप बनाए गए। दोनों ग्रुप को सॉल्व करने के लिए कुछ प्रॉब्लम दिए गए। एक ग्रुप के पास टीचर थी जो उन्हें हेल्प कर रही थी सलूशन आंसर निकालने में। जबकि दूसरे ग्रुप के पास ऐसी कोई हेल्प नहीं थी। उन्हें बस एक दूसरे के साथ डिस्कस करके आंसर निकालने थे। अब इसका रिजल्ट ऐसे आया कि फर्स्ट ग्रुप में easily सेकंड ग्रुप को हरा दिया। बल्कि सेकंड ग्रुप को कोई भी आंसर सही से नहीं मिले थे।
लेकिन कुछ टाइम बाद जब दोनों ग्रुप का रियल टेस्ट लिया गया same subject में तब सेकंड ग्रुप ने फर्स्ट ग्रुप से बहुत ज्यादा score किया था। और इस चीज को बोलते हैं Efficiency in failure.
यहां हुआ यूं कि सेकंड ग्रुप में बिना किसी की हेल्प लिए हुए खुद का ब्रेन का इस्तेमाल ज्यादा किया। गहराई से सोचा और न्यू आईडिया को समझा और नया कांसेप्ट को समझा वह भी अच्छे से और सॉल्यूशन find out किए। जिसके हेल्प से उन्होंने उस कांसेप्ट के बारे में बहुत कुछ सीख लिया। जबकि फर्स्ट ग्रुप को की गई spoon feeding उन्हें ले डूबी।
दोस्तों जब बात कंपटीशन का होता है तब जीतना बेस्ट होता है।लेकिन जब बात लर्निंग की होती है तो सीखना बेस्ट होता है और सीखने के लिए failure एक अच्छा तरीका है। यह मैं नहीं बोल रहा हूं यह बोल रहे हैं रिसर्च ऑफ सिंगापुर यूनिवर्सिटी।
और sadly हमारा एजुकेशन सिस्टम इसका उल्टा है वह हमें फेल होने से डर आता है।
जिसके वजह से कई बार हम सिर्फ पास होने लायक बचते हैं लेकिन सीखने लायक नहीं बचते। इसलिए यह कांसेप्ट सिखाता है कि जितना हो सके सीखने का प्रयास करो फेल होने का फिकर ना करो।
2. Passive v/s Active Learning
ये rule one of the best तरीका है कुछ सीखने के लिए। तो इसे ध्यान से समझना।
ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर उन्हें कुछ सीखना है या कुछ याद करना है, तो उसके लिए उन्हें जितना हो सके उतना इंफॉर्मेशन उनके दिमाग के अंदर डालने होंगे। शायद आपको भी यही लगता होगा। लेकिन असल में कुछ भी चीज याद दिमाग में कोई भी चीज है आने के बजाय, दिमाग से चीजें निकलने की वजह से होती है। मतलब इनपुट से ज्यादा आउटपुट जरूरी है।
इसे हम एक उदाहरण से देखते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को इंग्लिश सीखना है तो वह क्या करेगा। वीडियो ट्यूटोरियल देखेगा या बैठकर क्लास लगाएगा। यहां पर प्रॉब्लम आता है कि कुछ भी बैठ कर देखना सुनना या सीखना passive learning होती है। जिसमें बस इनपुट ज्यादा होता है आउटपुट नहीं। इसलिए वह बहुत कम इफेक्टिव होता है compare to activate learning. यहां आपको अपने दिमाग का ज्यादा यूज नहीं करना पड़ता है। कुछ सीखने के लिए हमें कुछ आउटपुट देना होता है बजाएं बस इनपुट लेने के और यही चीज बेस्ट होती है कुछ भी सीखने के लिए।
इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं।
इंग्लिश सिर्फ सीखते रहना या सुनते रहने के बजाय,इंग्लिश खुद से बोलना किसी से बात करना प्रैक्टिस करना यह सबसे बेस्ट तरीका है उसे सीखने का।
क्योंकि इससे आपका दिमाग ज्यादा यूज होता है। लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं करते। इसलिए वह चीजें जल्दी सीख भी नहीं पाते हैं। अगर देखा जाए तो हमारा एजुकेशन सिस्टम भी हमें passive learning ही करवाता है। बस बैठकर लेक्चर सुनना जो बोरिंग भी होता है और बेस्ट भी नहीं होता।
Researchers ने अलग-अलग learning model techniques का स्टडी किया। यह पता लगाने के लिए कौन सी Active Learning model बेस्ट होती है चीजें याद करने के लिए। तो इससे उन्हें पांच टेक्निक मिले जो बहुत ज्यादा पावरफुल होते हैं। जबकि उन्हें पांच ऐसे भी model मिले जो इतने best नहीं होते। पर जो इतने great model नहीं है वही maximum लोग यूज़ करते हैं।
1. Summarization
Summarization आप के लिए बेस्ट नहीं है। क्योंकि इससे आपका दिमाग ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए आप बुक को पढ़ो या उसे सुनो।
2. Highlighting
किसी पेन से इंपॉर्टेंट चीजें मार्क करना।
3. Mnemonic
Shortcut trick
4. Imagery
मतलब फोटो , इमेज का इस्तेमाल करना किसी चीज को याद करने के लिए।
5. Re reading
मतलब वापस से बस चीजें पढ़ना।
अब बात करते हैं उन पांच मॉडल की जो इन से ज्यादा इफेक्टिव है।
1. Practice testing
कोई भी चीज याद करने के बाद उसे बिना देखे बोलने या लिखने का प्रयास करना।
2. Eleborated intorogation
जो चीज याद करना है उस से रिलेटेड बहुत से सवाल करना। और उन सवालों का आंसर ढूंढने का प्रयास करना।
3. Distributed Practice
बस 1 दिन 7 घंटे कुछ सीखने के बजाय 7 दिन वही चीज बस 1- 1 घंटे करना।
4. Self Explanation
अपने आपको उस चीज को अच्छे से एक्सप्लेन करना।
5. Interleaved Practice
एक साथ पूरा दिन एक ही lession पढ़ने के बजाय similar type के अलग-अलग चैप्टर को पढ़ना। जिससे Brain को Variety मिले।
3 DEEP v/s SURFACE LEARNING
सोचो कि एक आदमी को एक रेसिपी सीखना है। जो उसकी मां की बनाई हुई पसंदीदा रेसिपी है। अब उसे यह सीखने के लिए दो तरीके हैं
1. Popular तरीका।
मतलब मां से पूछ कर रेसिपी लिख लेना फिर उसके हिसाब से खाना बनाना। या फिर यूट्यूब पर वीडियो देखते-देखते बनाना। जिसके बाद खाना Ready.
पर जब उन्हें वापस वही same चीज बनानी होगी तो वापस उन्हें फिर से लिखी गई रेसिपी को ढूंढना पड़ेगा या फिर वापस फोन करके पूछना या वीडियो देख कर खाना बनाना पड़ेगा। फिर यही प्रोसेस बार-बार करना जब तक बना बना के सारे स्टेप्स याद नहीं हो जाते। अब यह तरीका सच बोलूं तो बेस्ट नहीं है।
यह लोगों का बहुत टाइम वेस्ट कर देता है और ना ही लोगों को उनके पीछे का लॉजिक समझने देता है। जैसे कि जब बच्चों को कोई आंसर याद करना होता है तो वह उसे बार-बार पड़ता है। फिर भी वह उसे याद नहीं रहता है। जबकि कुछ लोग उसे एक दो बार पढ़कर उसे याद कर लेते हैं। क्योंकि वह Deep learning करते हैं ना कि surface learning.
2. Deep Learning
मतलब चीजों को गहराई से समझना कांसेप्ट के साथ समझना कि जो भी हो रहा है वह क्यों हो रहा है। ना कि बस रट्टा मार के चीजों को याद करने का कोशिश करना। खाना बनाने के उदाहरण को बताऊं तो अगर वह आदमी सिर्फ सरफेस पर सीखने के बजाय एक बार थोड़ा एक्स्ट्रा मेहनत करके डिप्ली समझ ले कि वह जो भी स्टेप ले रहा है क्यों ले रहा है। तो उसको रेसिपी एक ही बार में याद हो सकती है।
जैसा किस समझो कि वह तीन चीजों को भूल रहा है।
पहला कांदे को तेल में डालना
दूसरा उसके साथ लहसुन डालना फिर लाल होने तक पकाना
फिर उसके बाद सोच को अच्छी तरह से उबालना। उसके बाद सब को मिलाकर 10 मिनट के लिए धीमी आंच पर छोड़ देना।
अब बस समझो। अगर कोई deeply समझ जाए कि ऐसा क्यों करना है। मतलब कांदे को लाल करने हैं क्योंकि इससे आगे डालने वाली चीजों के लिए एक फ्लेवर बेस तैयार हो जाएगा। फिर लास्ट में इसे धीमी आंच में 10 मिनट क्यों पकाना है? क्योंकि इससे सारे चीज एक दूसरे से मिल जाएंगे अच्छे से।
अगर कोई भी इंसान है आप इस तरीके से कुछ सीखोगे, तो आपको चीजें बहुत ही जल्दी और अच्छी से याद होगी।
अब कोई बोलेगा यार इतना नहीं पता लगाने की क्या जरूरत है वह भी सिर्फ खाना बनाने के लिए।
तो देखो यार पहली बात यह है कि यह सिर्फ खाना बनाने की नहीं है। ये mentality बनाने की है और दूसरी बात ऐसा करने से आप चीजों के पीछे का विज्ञान समझोगे।
या फिर कोई दूसरा काम करने में उसके पीछे का असली वजह समझ पाओगे। मगर हम ऐसा नहीं सोचते हैं। और यही हमारी प्रॉब्लम भी है। हम हमेशा short-term सोचते हैं। Surface learner बनते हैं बजाय Deep learner बनने के।

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